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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 66
वारप्रवृत्ति: वायप्रवृत्ति: प्रागदेशे क्षपार्धथडभ्यधिके भवेत्‌ । तद्देशान्तरनाडीभि: पश्चादूने विनिर्दिशेत्‌ ॥
रेखादेश से पूर्ववर्ती देशों में रेखादेशीय मध्यरात्रि काल से देशान्तर नाडी तुल्य अधिककाल में (मध्यरात्रि काल) वारप्रवत्ति होती है। इसी प्रकार पश्चिमस्थ देशों में देशान्तर घटी तुल्य पहले वार प्रवृत्ति (मध्यरात्रि काल में) होती है।
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