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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 61
कलादि तत्फल ्राच्यां ग्रहेभ्य: परिशोधयेत्‌ । रेखाप्रतीचीसंस्थाने प्रक्षिपेत्‌ु स्यु:ः स्वदेशजा: ॥
लब्ध कलादि फल को, रेखादेश से पूर्व में गणितागत ग्रह में घटाने तथा पश्चिम में जोड़ने से स्वदेशीय मध्यमग्रह होते हैं। (इष्टस्थान यदि रेखा देश से पूर्व हो तो मध्यमग्रह में घटाने तथा इष्टस्थान पश्चिम होने पर मध्यम ग्रह में जोड़ने से इष्ट स्थान के अर्धरात्रिकालिक ग्रह होते हैं।)
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