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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 60
स्पष्ट भूपरिधि: देशान्तरसंस्कारश्च लम्बज्याध्नस्त्रिजीवाप्त: स्फुटो भूपरिधि: स्वक: । तेन देशान्तराभ्यस्ता ग्रहभुक्तिर्विभाजिता ॥
भूपरिधि को स्वदेशीय लम्बज्या से गुणाकर त्रिज्या से भाग देने पर लब्धि स्वदेशीय (इष्ट) भूपरिधि होती है। इष्टस्थान के देशान्तर योजन को ग्रहगति कला से गुणाकर स्वदेशीय भूपरिधि से भाग देने पर
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