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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 6
न मे तेज: सह: कश्चिदाख्यातु नास्ति मे क्षण: । मदंश: पुरुषोड्यं ते निश्शेष॑ कथयिष्यति ॥
(मैं तुम्हें ज्योतिषशास्त्र का ज्ञान देना चाहता हूँ परन्तु) मेरे तेज को सहन करने की शक्ति किसी प्राणी में नहीं है तथा मेरे पास इतना समय भी नहीं है कि मैं ज्योतिष शास्त्र का व्याख्यान कर सकूँ। अत: मेरा यह अंशावतार पुरुष ही तुम्हें समग्र ज्योतिष शास्त्र का ज्ञान करायेगा।
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