आठ सौ योजन का द्विगुणितमान अर्थात् १६०० योजन पृथ्वी का कर्ण (व्यास) होता है। उस (व्यास) के वर्ग को दश से गुणा कर गुणनफल का वर्गमूल लेने से भूपरिधि होती है।
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