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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 58
मकरादौ शंशाड्लोच्च॑ तत्पातस्तु तुलादिग: । निरंशत्वं गताश्चान्ये नोक्तास्ते मन्दचारिण: ॥
मन्द गति के कारण अन्य ग्रहों के पात पूर्णरूप से अंशो का उपभोग नहीं कर पाये थे, (फलत: वे राशियों के मध्यवर्ती अंशो में ही थे ), इसलिए उनके सम्बन्ध में कुछ भी नहीं कहा गया।
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