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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 55
द्वादशघ्ना गुरोर्याता भगणा वर्तमानके: । राशिभि: सहिता: शुद्धा: षष्ट्या स्युर्विजयादय: ॥
बृहस्पति के गत भगणों की संख्या को १२ से गुणा कर उसमें वर्तमान भगण की राशि संख्या को जोड़कर ६० से भाग देने पर शेष संख्या तुल्य विजयादि क्रम से संवत्सर होते हैं।
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