बृहस्पति के गत भगणों की संख्या को १२ से गुणा कर उसमें वर्तमान भगण की राशि संख्या को जोड़कर ६० से भाग देने पर शेष संख्या तुल्य विजयादि क्रम से संवत्सर होते हैं।
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