अहर्गण को दो स्थानों में रखकर एक स्थान में मास दिन संख्या अर्थात् ३० से तथा दूसरे स्थान पर वर्ष दिन (३६० ) से भाग देने पर जो लब्धि हो उसमें क्रम से २ और ३ से गुणाकर १-१ जोड़ने से जो संख्या हो उसे पृथक-पृथक् ७ से भाग देने पर क्रम से शेष तुल्य रव्यादि ग्रह मासेश और वर्षेश होते है।
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