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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 50
द्विष्ठास्तिथिक्षयाभ्यस्ताश्चान्बरवासरभाजिता: । लब्धोनरात्रिरहिता लड्जायामार्धरात्रिका: ॥
एक स्थान पर दिन संख्या को युगक्षय तिथियों की संख्या स्ने गुणा कर युगचान्द्र दिनों (युगतिथियां ) से भाग देने पर लब्धि क्षयतिथियों की संख्या होगी। उसे द्वितीय स्थान में स्थित दिन संख्या से घटाने पर शेष सावन दिन संख्या होगी। सावन दिन संख्या में १ रात्रि (१ दिन) घटाने से लड्ढा में अर्द्ध रात्रि कालिक सावन अहर्गण होता है।
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