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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 48
अत ऊर्ध्वममी युक्ता गतकालाब्दसड्ख्यया । मासीकृता युता मार्सर्मधुशुक्लादिभिग्गतै: ॥
इसके (पूर्वोक्त सृष्ट्यादि से कृत युगान्त सौर वर्ष में) अनन्तर गत वर्षो की संख्या को जोड़कर योग को १२ से गुणा कर मास बना ले तथा अभीष्ट समय तक के चैत्र शुक्लादि गत मासों की संख्या को जोड़कर दो स्थानों में रखें।
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