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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 43
मनुदस्तास्तु कौजस्य बौधस्याष्टाष्टसागरा: । कृताद्रिचन्द्रा जैवस्य त्रिखाड्लाश्च तथा भूगो: ॥ ४
एक कल्प में मंगल का पात २१४, बुध का पात ४८८, गुरु का पात १७४, शुक्र का पात ९०३, एवं शनि का पात ६६२ भगण पूर्ण करता है।
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