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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 42
खखरन्ध्राणि जैवस्य शोक्रस्यार्थगुणेषव: । गोडग्नय: शनिमन्दस्य पातानामथ वामतः ॥
गुरु का मन्दोच्च ९०० भगण, शुक्र का मन्दोच्च ५३५ तथा शनि का मन्दोच्च ३९ भगण पूर्ण करता है। पात (ग्रहविमण्डल और क्रान्तिमण्डल का सम्पात) विपरीत दिशा में (पश्चिमाभिमुख ) भ्रमण करता है।
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