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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 40
कल्पेष्धिमासादीनां मानानि अधिमासोनरात्र्य क्षचाद्स्‍रसावनवासरा: । एते सहस्नगुणिता: कल्पे स्युर्भगणादय: ॥
पूर्वाक्त अधिमास, दिनक्षय (क्षयतिथि), नाक्षत्र-चान्द्र-सावन दिनों की संख्या तथा ग्रहों की भगण संख्या को एक सहस्न (१०००) से गुणा करने पर एक कल्प में अधिमासादि की संख्या हो जाती है।
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