मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 39
खचतुष्कसमुद्राष्ट-कुपञ्च रविमासका: । भवन्ति भोदया भानु-भगणैरूनिता: क्वहा:॥ ३९॥
५१८४०००० सौरमास होते हैं। नक्षत्रों के उदय (भगण) से सौरभगण घटाने से शेष भूमि सावन दिन होते हैं। अर्थात्‌ नाक्षत्र भगण - सौर भगण = सावन दिन।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें