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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 36
सावनदिनस्य परिभाषा अवममानं च सावनाहानि चाद्देभ्यो द्युभ्य: प्रोज्झय तिथिक्षया: । उदयादुदयं भानोर्भूमिसावनवासर: ॥
चान्द्र दिवसों से सावन दिवसों को घटाने से शेष तिथि क्षय (अवम) होता है। सूर्य के एक उदय काल से दूसरे उदय काल पर्यन्त, भूमि का सावन दिन होता है। (पृथ्वी पर व्यवहार में आने वाला दिन होता है)।
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