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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 34
भभ्रमानि ग्रहसावनदिनानि च भानामष्टाक्षिवस्वद्रित्रिद्विक्न्यष्टशरेन्दव: । भोदया भगणै: स्वे: स्वैरूना: स्वस्वोदया युगे ॥
एक महायुग में प्रवहवायु वश नक्षत्रों की भगण संख्या १५८२२३७८२८ होती हैं। नाक्षत्र उदय काल (नक्षत्र भगण) में से ग्रहों के अपने-अपने भगण घटाने पर शेष तत्तद ग्रहों के सावन दिन होते हैं।
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