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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 3
वेदाड़मग्रम्मखिलं ज्योतिषां गतिकारणम्‌ । आराधयन्‌ विवस्वन्तं तपस्तेपे सुदुश्चरम्‌ ॥
समस्त वेदाड़ों में श्रेष्ठ ज्योतिष्पिण्डों (ग्रहों) के गति के कारणभूत (प्रतिपादक) परम पवित्र एवं भगवान्‌ सूर्य की आराधना करते हुये घोर तपस्या किया।
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