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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 27
गतिभेदेन भगणकाल: शीघ्रगास्तान्यथाइल्पेन कालेन महताउइलल्‍पग: । तेषां तु परिवर्तेन पौष्णान्ते भगण: स्मृत: ॥
शीघ्र गति वाले ग्रह अल्प काल में तथा मन्द गति वाले ग्रह अधिक काल में उन २७ नक्षत्रों का भोग करते हैं। इस प्रकार (नक्षत्रों में) भ्रमण करते हये रेवती नक्षत्र के अन्त में ग्रहों का भगण पूर्ण होता है।
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