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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 26
प्राग्गतित्वमतस्तेषां भगणै: प्रत्यहं गति:। परिणाहवशाद्‌ भिन्‍ना तद्बशाद्‌ भानि भुछ्जते ॥
अत: इन ग्रहों का पूर्वाभिमुख गमन ही प्रमाणित होता है। अपनी-अपनी कक्षा के अनुसार इनकी दैनिक गति भिन्न-भिन्न होती है तथा उसी (दैनिक) गति के अनुसार ग्रह राशिचक्र का भोग करते हुये भगण पूर्ण करते हैं।
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