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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 25
ग्रहाणां गतिकारणम्‌ पश्चाद्‌ व्रजन्तोडतिजवान्नक्षत्रै: सतत ग्रहा: । जीयमानास्तु लम्बन्ते तुल्यमेव स्वमार्गगा: ॥
प्रवह नामक वायु से प्रेरित होकर ग्रह निरन्तर अत्यन्त वेग से पश्चिम दिशा में जाते हुये दिखलाई पड़ते है। परन्तु नक्षत्रों से पराभूत होते हुये अपनी-अपनी कक्षा में सभी ग्रह समान योजन पूर्व दिशा में चलते हैं (अर्थात्‌ ग्रह अपनी-अपनी कक्षा में समान गति से पश्चिम से पूर्व दिशा में भ्रमण करते हैं)।
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