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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 24
सृष्टिकालप्रमाणम्‌ ग्रहर्क्-देव-दैत्यादि सृजतोडस्य चराचरम्‌ । कृताद्विवेदा दिव्याब्दा: शतघ्ना वेधसों गता: ॥
ग्रह, नक्षत्र, देव, दैत्य आदि चर (जड्गम जीव-जन्तु) अचर (स्थावर वृक्ष, पर्वतादि) की रचना करने में ब्रह्मा को कल्पारम्भ से शत गुणित ४७४ दिव्य वर्ष (४७४ x १०० = ४७४०० दिव्य वर्ष) बीत गये। अर्थात्‌ कल्पारम्भ से ४७४०० दिव्य वर्ष के अनन्तर सृष्टि काल का आरम्भ हुआ है।
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