अष्टाविशशाद्युगादस्माद्यातमेतम् कृतं॑ युगम् ।
अत: काल प्रसड्ख्याय सड्ख्यामेकत्र पिण्डयेत् ॥
वर्तमात्त अठ्ठाइसवें महायुग में कृत (सत्य) युग बीत चुका है। अत: कालमानों को एकत्र कर उनका योग कर लेना चाहिये।
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