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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 2
मयासुरतपो वर्णनम्‌ अल्पावशिष्टे तु कृते मयो नाम महासुर: । रहस्य परम॑ पुण्य जिज्ञासुज्ञनिमुत्तमम्‌ ॥
सत्ययुग के स्वल्पकाल शेष रह जाने पर (सत्ययुग के अन्त में) पय नामक महान्‌ असुर ने गूढ़ ज्यौतिष शास्त्र के उत्तम ज्ञान के प्रति जिज्ञासु होकर
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