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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 19
कल्पप्रमाणम्‌ ससन्धयस्ते मनव: कलपे ज्ञेयाश्चतुर्दश । कृतप्रमाण: कल्पादौ सन्धि: पञ्चदश: स्मृत: ॥
एक कल्प में सन्धि सहित पूर्वोक्त १४ मनु होते हैं। कल्प के आदि में कृत (सत्य) युग के तुल्य सन्धि होती है। इस प्रकार १ कल्प में सत्ययुग के समान १५ सन्धियाँ होती हैं।
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