मूर्त (व्यावहारिक) काल प्रमाण में ७१ महायुगों (चतुर्यगों) का एक मन्वन्तर कहा गया है। एक मनु के अन्त में कृतयुग (४८०० दिव्य वर्ष) तुल्य मनु की सन्धि होती है। सन्धि काल जलप्लव कहलाता है। अर्थात् एक मनु के समाप्ति और द्वितीय मनु के आरम्भ के पूर्व ४८०० दिव्य वर्षो तक पृथ्वी पर जल-प्छावन रहता है।
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