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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 17
युगस्य दशमो भागश्चतुस्त्रिद्देकसंगुण: । क्रमात्‌ कृतयुगादीनां षष्ठांश: सन्ध्ययो: स्वक: ॥
महायुग के मान (१२००० दिव्य वर्ष) के दशमांश को क्रम से ४, ३, २ और १९ से गुणा करने पर क्रम से कृत, त्रेता, द्राप और कलियुग का मान होता है। अपने अपने युगमान के षष्ठांश तुल्य दोनों सन्धियाँ होती है।
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