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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 14
स्ुुरासुराणां दिनरात्रिव्यवस्था सुरासुराणामन्योन्यमहोरात्र विपर्ययात्‌ । तत्षष्टि: षड्गुणा दिव्य वर्षमासुरमेव च ॥
देवताओं और असुरों का अहोरात्र (दिन एवं रात्रि) एक दूसरे से विपरीत क्रम से होता है। (जब देवताओं का दिन तब दैत्यों की रात्रि तथा जब देवों की रात्रि तब देत्यों का दिन होता है) छ से गुणित उन साठ अहोरात्रों के तुल्य देवों का तथा दैत्यों का एक वर्ष होता है। अर्थात्‌ ६ ५८ ६० - ३६० सौर वर्षो का एक दिव्य वर्ष होता है।
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