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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 11
प्राणादि: कथितो मूर्तस्त्रुट्याद्योअ्मूर्तसंज्ञक: । षड्भि: प्राणैर्विनाडीस्यात्तत्षष्ट्या नाडिका स्मृता ॥
प्राण आदि मूर्त संज्ञक और त्रुटि आदि अमूर्त संज्ञक काल कहे गये हैं। ६ प्राण की एक विनाडी (पल ), ६० विनाडी (पल ) की १ नाडी, ६० नाडी (घटी ) का एक नाक्षत्र अहोरात्र कहा गया है।
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