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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 10
काल भेद: लोकानामन्तकृत्‌ काल: कालोज्न्य: कलनात्मक: । स॒ द्विधा स्थूलसूक्ष्मत्वान्मूर्तश्चामूर्त उच्यते ॥
(काल दो प्रकार का होता है) एक काल प्राणियों (सृष्टि) का संहार करने वाला तथा दूसरा गणना करने वाला होता है। कलनात्मक काल (गणना करने वाला) दो तरह का होता है पहला स्थूल होने से मूर्त संज्ञक (व्यावहारिक) और दूसरा सूक्ष्म होने से अमूर्त संज्ञक (अव्यवहारिक) कहा जाता है।
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