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सुबाल • अध्याय 6 • श्लोक 3
आदित्या रुद्रा मरुतो वसवोऽश्विनावृचो यजूंषि सामानि मन्त्रोऽग्निराज्याहुतिर्नारायण उद्भवः संभवो दिव्यो देव एको नारायणः ॥
आदित्य, रुद्र, वायु, वसु, अश्विनीकुमार, वेद, यजुर्वेद और सामवेदादि के मन्त्र, अधि और घृत की आहुति भी नारायण ही हैं। यही नारायण एक, दिव्य, देव और सभी के उत्पत्ति रूप हैं।
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