चक्षुश्च द्रष्टव्यं च नारायणः श्रोत्रं च श्रोतव्यं च नारायणो घ्घ्राणं च घातव्यं च नारायणो जिह्वा च रसयितव्यं च नारायणस्त्वक् च स्पर्शयितव्यं च नारायणो मनश्च मन्तव्यं च नारायणो बुद्धिश्च बोद्धव्यं च नारायणोऽहंकारश्चाहंकर्तव्यं च नारायणश्चित्तं च चेतयितव्यं च नारायणो वाक् च वक्तव्यं च नारायणो हस्तौ चादातव्यं च नारायणः पादौ च गन्तव्यं च नारायणः पायुश्च विसर्जयितव्यं च नारायण उपस्थश्चानन्दयितव्यं च नारायणो धाता विधाता कर्ता विकर्ता दिव्यो देव एको नारायणः ॥
चक्षु और द्रष्टव्य नारायण हैं, श्रोत्र और श्रोतव्य नारायण हैं, प्राण शक्ति और प्रातव्य नारायण है, जिह्वा और रस लेने का विषय नारायण हैं, त्वचा और स्पर्शयितव्य नारायण हैं, मन और मन्तब्य (मन का विषय) नारायण हैं, बुद्धि और बुद्धि का विषय नारायण हैं, अहंकार और अहंकत्र्तव्य नारायण हैं, चित्त और चिन्तन नारायण हैं, वाक् और वक्तव्य नारायण हैं, हाथ और दातव्य (देने का विषय) नारायण हैं, पैर और गन्तव्य नारायण हैं, पाबु (गुदा) और विसर्जयितव्य नारायण हैं, उपस्थ और आनन्दयितव्य (आनन्द का विषय) नारायण हैं। नारायण ही धाता (धारण कर्ता), विधाता, कर्ता, विकर्ता (विशिष्ट रूप से रचना करने वाला) और एकमात्र दिव्य देव हैं।
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