अहंकारो ऽध्यात्ममहंकर्तव्यमधिभूतं रुद्रस्तत्राधिदैवतं नाडी तेषां निबन्धनं योऽहंकारे योऽहंकर्तव्ये यो रुद्रे यो नाड्यांनन्तम् ॥
अहंकार अध्यात्म है, अहंकर्तव्य (अहं का विषय) अधिभूत है, रुद्र अधिदैवत हैं और नाड़ी इनका मूल स्थान है। जो अहंकार में, अहं के विषय में, रुद्र में, नाड़ी में अनन्त है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सुबाल के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।