नासाध्यात्मं घातव्यमधिभूतं पृथिवी तत्राधिदैवतं नाडी तेषां निबन्धनं यो नासायां यो ब्रातव्ये यः पृथिव्यां यो नाड्यांनन्तम् ॥
(उपर्युक्त के समान ही) नासिका अध्यात्म है, घ्रातव्य (सूँघने के विषय) अधिभूत हैं और पृथिवी अधि दैवत है। नाड़ी उनका मूल स्थान है। जो नासिका में, घ्रातव्य गन्ध में, पृथिवी में, नाड़ी में अनन्त है
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