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सुबाल • अध्याय 5 • श्लोक 10
वागध्यात्मं वक्तव्यमधिभूतमग्निस्तत्राधिदैवतं नाडी तेषां निबन्धनं यो वाचि यो वक्तव्ये योऽग्रौ यो नाड्यांनन्तम् ॥
(उपर्युक्त की तरह ही) वाक् (वाणी) अध्यात्म है, वक्तव्य अधिभूत है और अग्नि अधिदैवत हैं। नाड़ी इनका मूल स्थान है। जो वाणी में, वक्तव्य में, अग्नि में, नाड़ी में अनन्त है।
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