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सुबाल • अध्याय 2 • श्लोक 1
अपानान्निषादा यक्षराक्षसगन्धर्वाश्चास्थिभ्यः पर्वता लोमभ्य ओषधिवनस्पतयो ललाटात्क्रोधजो रुद्रो जायते ॥
(उस पूर्व वर्णित विराट् के) अपान वायु से निषाद, यक्ष, राक्षस और गन्धर्व, अस्थियों से पर्वत, रोमों से ओषधि-वनस्पतियाँ और क्रोध (युक्त) ललाट से रुद्र उत्पन्न हुए।
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