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सुबाल • अध्याय 1 • श्लोक 6
ब्राह्मणोऽस्य मुखमासी‌द्वाहू राजन्यः कृतः । ऊरू तदस्य यद्वैश्यः पद्भ्यां शूद्रो अजायत। चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायत। श्रोत्राद्वायुश्च प्राणश्च हृदयात्सर्वमिदं जायते ॥
इस विराट् पुरुष के मुख से ब्राह्मण, दोनों बाँहों से क्षत्रिय, दोनों जंघाओं से वैश्य तथा दोनों पैरों से शूद्र उत्पन्न हुए। मन से चन्द्रमा, चक्षु से सूर्य, श्रोत्र से वायु तथा प्राण और हृदय से यह सम्पूर्ण जगत् उत्पन्न हुआ।
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