तस्य ब्रह्मा बिभेति स ब्रह्माणमेव विवेश स मानसान्सप्त पुत्रानसृजत्ते ह विराजः सप्त मानसानसृजन्ते ह प्रजापतयः ॥
अपने द्वारा रचे हुए इस रूप को देखकर वह (ब्रह्मा) भयभीत हुए, तब वे (रुद्र) ब्रह्मा में ही प्रविष्ट हो गये। तदनन्तर उन्होंने (ब्रह्मा ने) सात मानस पुत्र उत्पन्न किये, उन सात पुत्रों ने (पुनः) सात विराट् मानसपुत्रों को जन्म दिया, वे (सात पुत्र) ही प्रजापति हुए।
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