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सुबाल • अध्याय 1 • श्लोक 2
तस्मात्तमः संजायते तमसो भूतादिर्भतादेराकाशमाकाशाद्वायुर्वायोरग्निरग्नेरापोऽद्भयः पृथिवी ॥
(इसके बाद क्या-क्या उत्पन्न हुआ? इस प्रश्न के उत्तर में ऋषि ने कहा -) सर्वप्रथम आदितत्त्व से) तम की उत्पत्ति हुई, तम से भूत आदि (अक्षर, अव्यक्त, अहंकार आदि) का आविर्भाव हुआ। भूतादि से आकाश, आकाशः से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल और जल से पृथ्वी उत्पन्न हुई।
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