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श्वेताश्वतर • अध्याय 6 • श्लोक 9
न तस्य कश्चित्‌पतिरस्ति लोके न चेशिता नैव च तस्य लिङ्गम्‌। स कारणं करणाधिपाधिपो न चास्य कश्चिज्जनिता न चाधिपः॥
इस लोक में 'उसका' कोई स्वामी नहीं है, न ही कोई 'उसके' ऊपर शासनकर्ता है। न हीं 'उसका' कोई रूप है न कोई लिंग है; क्योंकि 'वह' स्वयं ही उत्पत्ति का कारण तथा प्रकृतिगत करणों (साधनों) के अधिपतियों का 'अधिपति' है, किन्तु न कोई उसका जनक (उत्पत्तिकर्ता) है न ही कोई 'उसका' अधिपति-स्वामी है।
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