'ईश्वर' कर्म करता है, तथा अपने कर्मों से पुनः निवृत्त हो जाता है 'वह' एक अथवा दो अथवा तीन अथवा आठ (अर्थात् चाहे जितने) तत्त्वों के 'तत्त्व' से 'स्वयं' को जोड़ लेता है, उसी तरह वह 'काल' से स्वयं को जोड़ लेता है एवं 'आत्मा' के सूक्ष्म गुणों तथा कर्मों के साथ 'स्वयं' को जोड़ लेता है।
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