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श्वेताश्वतर • अध्याय 6 • श्लोक 3
तत्कर्म कृत्वा विनिवर्त्य भूयस्तत्त्वस्य तत्त्वेन समेत्य योगम्‌। एकेन द्वाभ्यां त्रिभिरष्टभिर्वा कालेन चैवात्मगुणैश्च सूक्ष्मैः॥
'ईश्वर' कर्म करता है, तथा अपने कर्मों से पुनः निवृत्त हो जाता है 'वह' एक अथवा दो अथवा तीन अथवा आठ (अर्थात् चाहे जितने) तत्त्वों के 'तत्त्व' से 'स्वयं' को जोड़ लेता है, उसी तरह वह 'काल' से स्वयं को जोड़ लेता है एवं 'आत्मा' के सूक्ष्म गुणों तथा कर्मों के साथ 'स्वयं' को जोड़ लेता है।
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