मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
श्वेताश्वतर • अध्याय 6 • श्लोक 19
यदा चर्मवदाकाशं वेष्टयिष्यन्ति मानवाः। तदा देवमविज्ञाय दुःखस्यान्तो भविष्यति॥
जब मानव सन्तति आकाश को चर्म के समान आवेष्टित करके धारण करेगी तथा द्युलोकों को परिधान के समान अपने ऊपर लपेट लेगी, केवल तब अपने 'प्रभु', 'ईश्वर' के ज्ञान के बिना ही 'जगत्' के दुःखों का अन्त हो जायेगा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
श्वेताश्वतर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

श्वेताश्वतर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें