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श्वेताश्वतर • अध्याय 5 • श्लोक 6
तद्वेदगुह्योपनिषत्सु गूढं तद्ब्रह्मा वेदते ब्रह्मयोनिम्‌। ये पूर्वंदेवा ऋषयश्च तद्विदुस्ते तन्मया अमृता वै बभूवुः॥
यह वह गूढ रहस्य है जो उपनिषदों में निहित है; क्योंकि उपनिषद् वेद का ही रहस्य हैं। 'यह' वही है जिसे ब्रह्मा 'ब्रह्म-योनि'- शाश्वततत्व के गर्भ के रूप में जानते हैं तथा जिन पूर्व देवगणों एवं ऋषियों ने 'इसे' जान लिया वे 'इस' के साथ तद्रूप (तन्मय) होकर अमर हो गये।
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