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श्वेताश्वतर • अध्याय 5 • श्लोक 10
नैव स्त्री न पुमानेष न चैवायं नपुंसकः। यद्यच्छरीरमादत्ते तेने तेने स युज्यते॥
न 'यह' स्त्री है न ही पुरुष, न ही यह नपुंसक है; यह जो भी शरीर धारण करता है, वही 'उसे' अपने अन्दर सुरक्षित एवं आबद्ध रखता है।
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