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श्वेताश्वतर • अध्याय 4 • श्लोक 8
ऋचो अक्षरे परमे व्योमन्यस्मिन्देवा अधि विश्वे निषेदुः। यस्तं न वेद किमृचा करिष्यति य इत्तद्विदुस्त इमे समासते॥
परम अक्षर 'व्योम' में जहाँ समस्त देवों ने अपना आसन ग्रहण कर लिया है, वहीं हैं ऋग्वेद की ऋचाएँ, तथा जो 'उसे' नहीं जानता वह ऋचाओं से क्या कर लेगा? वे जो 'उसे' जानते हैं, वास्तव में वे ही इस प्रकार आसीन हैं।
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