कदाचित् कोई आश्चर्यभाव से भरकर इसे 'अजात' मानकर इसकी शरण में जाता है। हे रुद्र, आपका जो कल्याणकारी दक्षिणमुख है, उससे सर्वदा मेरी रक्षा करिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
श्वेताश्वतर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
श्वेताश्वतर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।