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श्वेताश्वतर • अध्याय 4 • श्लोक 19
नैनमूर्ध्वं न तिर्यञ्चं न मध्ये न परिजग्रभत्‌। न तस्य प्रतिमा अस्ति यस्य नाम महद्यशः॥
'उसको' न कोई ऊपर से पूर्णरूप से पकड़ सकता है, न समान धरातल पर (अगल-बगल से), न मध्य में; उसकी कोई छवि (प्रतिमा) नहीं बनायी जा सकती जिसका नाम है 'महान् यश'।
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