'काल-गति' में 'वही' भुवनों का रक्षक है, 'वही' विश्व का अधिपति है जो समस्त चराचर में गुह्यरूप से निहित है,-ब्रह्मर्षियों एवं देवतों ने जिसमें 'योग' के द्वारा सायुज्य प्राप्त किया है; इस रूप में 'उसे' जानकर मनुष्य 'मृत्यु' के पाश को छिन्न-भिन्न कर देता है।
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