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श्वेताश्वतर • अध्याय 4 • श्लोक 13
यो देवानामधिपो यस्मिँल्लोका अधिश्रिताः। य ईशे अस्य द्विपदश्चतुष्पदः कस्मै देवाय हविषा विधेम॥
जो देवों का अधिपति है, जिसमें ये समस्त लोक आश्रित हैं, जो इन द्विपदों एवं चतुष्पदों पर शासन करता है, किस देव को हम अपनी हवि अर्पित करके पूजा करें?
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