यो देवानां प्रभवश्चोद्भवश्च विश्वाधिपो रुद्रो महर्षिः।
हिरण्यगर्भं पश्यत जायमानं स नो बुद्ध्या शुभया संयुनक्तु॥
वह जो देवो का प्रभव (जन्म) है तथा उनकी सत्ता का उद्भव है, जो विश्व का अधिपति है, 'रुद्र' है, 'महर्षि' -महान् द्रष्टा है, एवं जिसने जन्म ग्रहण करते हुए 'हिरण्यगर्भ' को देखा था,-वह हमें तेजस्वी तथा शुभ-बुद्धि से संयुक्त करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
श्वेताश्वतर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
श्वेताश्वतर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।