अनन्त पुरुष अंगुष्ठमात्र आकार में बुद्धि, भावना, कल्पना तथा संकल्प के द्वारा सभी प्राणियों के हृदय में उनकी अन्तरात्मा के रूप में निवास करता है। जो इस सत्य को अनुभव कर लेते हैं वे अमृतत्व प्राप्त कर लेते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
श्वेताश्वतर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
श्वेताश्वतर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।